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Showing posts from September, 2026

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला 12 सितम्बर 1939 — 31 मार्च 2022 न भूतो न भविष्यति…

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला गांव मुंडिया तहसील टोड़ाभीम जिला करौली राजस्थान 12 सितम्बर 1939 — 31 मार्च 2022 #VoiceOfMundiya न भूतो न भविष्यति… प्रणाम पटरी वाले बाबा। प्रणाम लाल पगड़ी वाले बाबा। प्रणाम वंचितों के मसीहा। प्रणाम योद्धा क्रांतिकारी। प्रणाम महान समाज सुधारक। प्रणाम महानायक। प्रणाम युगपुरुष। प्रणाम कर्नल बैंसला। कुछ व्यक्तित्व केवल अपने जीवनकाल तक सीमित नहीं रहते। वे अपने पीछे एक विचार, एक संघर्ष और एक इतिहास छोड़ जाते हैं। कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला भी ऐसा ही नाम हैं। करौली जिले के मूंडिया गांव से निकलकर भारतीय सेना में अपनी पहचान बनाने वाले बैंसला जी ने देश की सीमाओं पर सैनिक के रूप में सेवा की। वे 1962 के भारत-चीन युद्ध तथा 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में शामिल रहे और 1965 के युद्ध में युद्धबंदी भी बने। बाद में वे लेफ्टिनेंट कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए। लेकिन सेना से सेवानिवृत्ति उनके संघर्ष का अंत नहीं था। यहीं से उनके जीवन का दूसरा अध्याय शुरू हुआ—समाज के लिए संघर्ष का अध्याय। जब एक सैनिक ने समाज की आवाज उठाई राजस्थान के गुर्जर समाज में शिक्षा, रोजगार और...

आशा भोसले: एक आवाज़, जिसने कई पीढ़ियों की धड़कनों को सुर दिया

🎶 आशा भोसले: एक आवाज़, जिसने कई पीढ़ियों की धड़कनों को सुर दिया कुछ आवाज़ें कानों तक पहुंचती हैं, लेकिन कुछ सीधे दिल में उतर जाती हैं। आशा भोसले की आवाज़ ऐसी ही आवाज़ थी—जिसमें मोहब्बत की मिठास थी, जुदाई का दर्द था, जिंदगी की मस्ती थी और संगीत की गहराई भी। भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में जब महान गायिकाओं का जिक्र होता है, तो आशा भोसले का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। उनका संगीत सफर केवल गीत गाने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास, प्रयोग और अपनी अलग पहचान बनाने की एक असाधारण यात्रा है। आठ दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने हजारों गीतों को अपनी आवाज़ दी और हिंदी, मराठी सहित अनेक भारतीय भाषाओं में अपनी गायकी का जादू बिखेरा। भारत सरकार के अनुसार उन्होंने अलग-अलग संगीत शैलियों में अपनी पहचान बनाई और भारतीय संगीत की दुनिया पर अमिट छाप छोड़ी। आशा भोसले का जीवन परिचय पूरा नाम: आशा भोसले जन्म: 8 सितंबर 1933 जन्मस्थान: सांगली, महाराष्ट्र पिता: पंडित दीनानाथ मंगेशकर माता: शेवंती मंगेशकर बहन: भारत रत्न लता मंगेशकर पहला विवाह: गणपतराव भोसले दूसरा विवाह: संगीत...

सचिन पायलट को पंजाब भेजना -प्रमोशन है या राजस्थान की रेस से आउट करने का प्लान सचिन पायलट

सचिन पायलट को पंजाब भेजना - प्रमोशन है या राजस्थान की रेस से आउट करने का प्लान? कांग्रेस हाईकमान ने कल 5 सितंबर 2026 को बड़ा फेरबदल किया है। सचिन पायलट को पंजाब का जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज बनाया गया है, भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजा गया है। 6ade ये फैसला राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई पंजाब की मैराथन मीटिंग के ठीक 24 घंटे बाद लिया गया, जिसमें खड़गे, केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं। अब सवाल ये है - सोशल मीडिया पर पायलट समर्थक लिख रहे हैं "राहुल का करीबी", "हाईकमान का भरोसा"। हकीकत समझो। पायलट की जगह पंजाब नहीं, राजस्थान थी। राजस्थान का युवा आज भी सचिन पायलट को अगले मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में देखता है। वो सिर्फ टोंक से विधायक हैं, लेकिन उनकी ताकत राजस्थान की सड़कों पर है। उन्हें पंजाब भेजना क्या दर्शाता है? *1. 2027 में हार का ठीकरा किस पर फूटेगा?* पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं। वहाँ कांग्रेस में खुली गुटबाजी है - एक तरफ PPCC चीफ अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और दूसरी तरफ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का कैंप। भूपेश बघेल पर आरोप लगा...