सचिन पायलट को पंजाब भेजना -प्रमोशन है या राजस्थान की रेस से आउट करने का प्लान सचिन पायलट
सचिन पायलट को पंजाब भेजना - प्रमोशन है या राजस्थान की रेस से आउट करने का प्लान?
कांग्रेस हाईकमान ने कल 5 सितंबर 2026 को बड़ा फेरबदल किया है। सचिन पायलट को पंजाब का जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज बनाया गया है, भूपेश बघेल को पंजाब से हटाकर असम भेजा गया है। 6ade
ये फैसला राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई पंजाब की मैराथन मीटिंग के ठीक 24 घंटे बाद लिया गया, जिसमें खड़गे, केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं।
अब सवाल ये है - सोशल मीडिया पर पायलट समर्थक लिख रहे हैं "राहुल का करीबी", "हाईकमान का भरोसा"। हकीकत समझो।
पायलट की जगह पंजाब नहीं, राजस्थान थी।
राजस्थान का युवा आज भी सचिन पायलट को अगले मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में देखता है। वो सिर्फ टोंक से विधायक हैं, लेकिन उनकी ताकत राजस्थान की सड़कों पर है। उन्हें पंजाब भेजना क्या दर्शाता है?
*1. 2027 में हार का ठीकरा किस पर फूटेगा?*
पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं। वहाँ कांग्रेस में खुली गुटबाजी है - एक तरफ PPCC चीफ अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और दूसरी तरफ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी का कैंप।
भूपेश बघेल पर आरोप लगा कि वो वड़िंग का पक्ष ले रहे थे, इसलिए चन्नी कैंप ने उनसे दूरी बना ली थी। इसी गुटबाजी में कांग्रेस उलझी हुई है।
पंजाब में तीन बड़ी ताकतें हैं - सरकार में AAP, सत्ता की दौड़ में BJP और कांग्रेस। जमीन पर कांग्रेस की वापसी आसान नहीं है। ऐसे में अगर 2027 में कांग्रेस पंजाब हारती है, तो हार का जिम्मेदार कौन? सीधा नाम आएगा - इंचार्ज सचिन पायलट।
*2. राजस्थान वाला खेल पंजाब में रिपीट होगा*
यही गुटबाजी कांग्रेस ने राजस्थान में देखी - गहलोत vs पायलट। अब पंजाब का फॉर्मूला राजस्थान में लाया जाएगा। चन्नी ने तो स्वागत में बोल दिया - "हाईकमान के महत्वपूर्ण फैसले के लिए धन्यवाद" और वड़िंग ने कहा - "पायलट की एनर्जी से पार्टी में जोश आएगा"। मतलब दोनों गुट खुश होने का नाटक कर रहे हैं, लेकिन अंदर से लड़ाई जारी है।
*3. गहलोत के लिए खुला मैदान*
सबसे बड़ा फायदा अशोक गहलोत को। अगर कांग्रेस अभी होने वाले नगर निगम, नगर निकाय और पंचायत चुनाव जीत जाती है, तो गोविंद सिंह डोटासरा को हटाने का सवाल ही नहीं उठेगा। फिर पायलट को राजस्थान में बड़ा पद मिलना नामुमकिन।
आज की तारीख में सचिन पायलट राजस्थान में सिर्फ MLA हैं। दिल्ली में बड़े पद का राजस्थान में कोई मोल नहीं है।
राजस्थान में 2028 में चुनाव है। युवा चेहरा चाहिए, लेकिन हाईकमान ने उसे पंजाब की दलदल में झोंक दिया है। रणदीप सुरजेवाला को गुजरात+कर्नाटक, पायलट को सिर्फ पंजाब - ये प्रमोशन है या साइडलाइन?
*सीधा सवाल राहुल गांधी से -*
अगर सचिन पायलट आपके इतने ही करीबी हैं, तो उन्हें केंद्र में लाओ, राष्ट्रीय महासचिव संगठन में लाओ, राजस्थान का चेहरा घोषित करो। पंजाब में भेजकर उनके राजस्थान के भविष्य को दांव पर क्यों लगाया जा रहा है?
राजस्थान का युवा मुख्यमंत्री का चेहरा पंजाब में नहीं ढूंढ रहा।
समझो इस राजनीति को, ये इंचार्ज बनाना नहीं, राजस्थान की रेस से बाहर करने की स्क्रिप्ट है और इस स्क्रिप्ट के लेखक कोई और नहीं, जयपुर में बैठे हैं जो कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।
पायलट सपोर्टर ध्यान रखे। पायलट को हम CM देखना चाहते हैं राजस्थान का कॉंग्रेस गेम खेल रही हैं।।
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